दक्षिण भारत का सुहाना और धार्मिक सफर रूट मैप मित्रगण एवं पाठकवृंद , हाजिर हूं आपके सामने अपनी नयी यात्रा दक्षिण् भारत की लेकर ज...
दक्षिण भारत का सुहाना और धार्मिक सफर
रूट मैप
मित्रगण एवं पाठकवृंद , हाजिर हूं आपके सामने अपनी नयी यात्रा दक्षिण् भारत की लेकर जो कि करीब बीस दिन की यात्रा थी और निम्न स्थानो को घूमने के वृतांत इस यात्रा में मै आपके साथ साझा करूंगा
हैदराबाद—तिरूपति बालाजी— चेन्नई — रामेश्वरम —कन्याकुमारी—पदमनाभम पैलेस—बैकवाटर टूर —कोवलम बीच —मदुरै—थेक्कडी—मुन्नार—कोडाईकनाल—कुन्नूर—उटी—मैसूर—बैंगलोर—गोआ—खंडाला
ये जो उपर जगहे लिखी हैं वे इसी क्रम में लिखी हैं जैसे कि हम लोग गये यानि की आपके सामने ये रूट भी है ।
हर साल की तरह अब से दो साल पहले गर्मियो की छुटिटयो में हमारा मन फिर से घूमने के लिये मचल रहा था । पिछली बार जब हम अपनी खुद की गाडी लेकर बीस दिन की लम्बी घुमक्कडी पर गये थे तो उस टूर में बडा मजा आया था क्योंकि एक तो छुटिटयो की पूरी वसूली हो गयी थी और दूसरी बात ये थी कि ग्रुप में जाने में खर्चा भी कम आया था तो इस बार भी मा0 जी से बात काफी दिन से शुरू हो गयी थी और यहां जाने से पहले मै गंगासागर भी हो आया था जिसमें मेरी मुलाकात हिसार के पार्षद मनीराम गुर्जर से भी हो गयी थी जो कि सपत्नीक हिंदुस्तान घूमते रहते हैं । बातचीत में उन्होने कह दिया था कि जहां भी तुम चलोगे हमें बता जरूर देना । मा0 जी की और मेरी कई राउंड की बातचीत के बाद दक्षिण भारत में जाना फाइनल हुआ । पर जाने के साधनो की चर्चा के दौरान जो हमारा रूट बना था उसमें गाडी अपनी लेकर जाने में करीब 25 या 30 दिन लगते तो इस बार ये तय किया गया कि अपनी गाडी वहीं पर जाकर करेंगे और एक रूट बनाकर वहां के रिजर्वेशन करा लिये गये । बीच में 8 दिन तक कोई रिजर्वेशन नही था जिसके लिये हमें अपनी गाडी करनी थी तो तीन महीने पहले रिजर्वेशन कराकर हम निश्चिंत हो गये । हम तीन परिवारो के सिवाय मनीराम अंकल भी जा रहे थे पर रिजर्वेशन के अंतिम समय में अचानक उन्होने अपनी 9 वर्षीय नातिन जिसका नाम नियति था को भी साथ में लेने की ठानी । सब इच्छुक नही थे क्योंकि बच्चे अक्सर इतने दिन में परेशान हो जाते हैं सेा उन्हे कहा भी पर जब वे माने नही तो जो होगा देखा जायेगा कि तर्ज पर उसका भी रिजर्वेशन करा दिया । कई बार में रेलगाडिया तय की गयी और हमारी पहली ट्रेन थी एपी सम्पर्क क्रान्ति जो कि दिल्ली से सुबह सात बजकर 20 मिनट पर चलती है और वैसे तो तिरूपति भी जाती है पर चूंकि हमें हैदराबाद में उतरना था तो ये सुबह सवेरे सात बजे के करीब ही उतार देती है । सुबह के सात बजे दिल्ली से ट्रेन हो तो कोई बस का सहारा तो नही ले सकता उसके सामने दो ही विकल्प हैं कि या तो वो रात को दिल्ली में स्टेशन पर , होटल में या किसी परिचित के घर में जाकर रूके और सुबह पकडे या फिर सुबह गाडी करें तभी सुबह चलकर इस गाडी को पकडा जा सकता है हमारा सफर सौ किलेामीटर दूर का था इसलिये हमने एक गाडी किराये पर कर ली जो हमें लेकर दिल्ली के निजामुदीन स्टेशन पर जाने वाली थी । ट्रेन सुबह के सात बजे थी और अगले दिन पहले पडाव हैदराबाद में सुबह के सात बजे ही उतारने वाली थी । इसलिये सुबह करीब तीन बजे हम लोग बुढाना से चले और 6 बजे स्टेशन पहुंच गये । सामान सबका दो दो बैग हो गये थे क्योंकि ट्रेन में रख सकते हैं और बीस दिन के कार्यक्रम में इससे कम तो हो ही नही पाता । हालांकि सोचकर तो ये रखते हैं कि दोनेा एक एक बैग उठाकर चलेंगे लेकिन होता ये है कि अक्सर दोनो बैग हमें ही उठाकर चलने पडते हैं
मनीराम अंकल रात को ही हिसार से ट्रेन में बैठकर स्टेशन पर आ गये थे और फोन से सम्पर्क करने पर मिल गये । वो स्टेशन पर खडी हमारी गाडी में बैठ गये थे । मा0 जी और लाला जी का उनसे प्रथम मिलन हुआ और हम सबका उनकी प्यारी सी नातिन नियति से जो कि बहुत ही हंसमुख थी और पूरे सफर के दौरान ऐसा लगा ही नही कि कोई बच्चा हमारे साथ है । दिन भर तो हम सब बात करते रहे और रात को सो गये
रूट मैप
मित्रगण एवं पाठकवृंद , हाजिर हूं आपके सामने अपनी नयी यात्रा दक्षिण् भारत की लेकर जो कि करीब बीस दिन की यात्रा थी और निम्न स्थानो को घूमने के वृतांत इस यात्रा में मै आपके साथ साझा करूंगा
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हर साल की तरह अब से दो साल पहले गर्मियो की छुटिटयो में हमारा मन फिर से घूमने के लिये मचल रहा था । पिछली बार जब हम अपनी खुद की गाडी लेकर बीस दिन की लम्बी घुमक्कडी पर गये थे तो उस टूर में बडा मजा आया था क्योंकि एक तो छुटिटयो की पूरी वसूली हो गयी थी और दूसरी बात ये थी कि ग्रुप में जाने में खर्चा भी कम आया था तो इस बार भी मा0 जी से बात काफी दिन से शुरू हो गयी थी और यहां जाने से पहले मै गंगासागर भी हो आया था जिसमें मेरी मुलाकात हिसार के पार्षद मनीराम गुर्जर से भी हो गयी थी जो कि सपत्नीक हिंदुस्तान घूमते रहते हैं । बातचीत में उन्होने कह दिया था कि जहां भी तुम चलोगे हमें बता जरूर देना । मा0 जी की और मेरी कई राउंड की बातचीत के बाद दक्षिण भारत में जाना फाइनल हुआ । पर जाने के साधनो की चर्चा के दौरान जो हमारा रूट बना था उसमें गाडी अपनी लेकर जाने में करीब 25 या 30 दिन लगते तो इस बार ये तय किया गया कि अपनी गाडी वहीं पर जाकर करेंगे और एक रूट बनाकर वहां के रिजर्वेशन करा लिये गये । बीच में 8 दिन तक कोई रिजर्वेशन नही था जिसके लिये हमें अपनी गाडी करनी थी तो तीन महीने पहले रिजर्वेशन कराकर हम निश्चिंत हो गये । हम तीन परिवारो के सिवाय मनीराम अंकल भी जा रहे थे पर रिजर्वेशन के अंतिम समय में अचानक उन्होने अपनी 9 वर्षीय नातिन जिसका नाम नियति था को भी साथ में लेने की ठानी । सब इच्छुक नही थे क्योंकि बच्चे अक्सर इतने दिन में परेशान हो जाते हैं सेा उन्हे कहा भी पर जब वे माने नही तो जो होगा देखा जायेगा कि तर्ज पर उसका भी रिजर्वेशन करा दिया । कई बार में रेलगाडिया तय की गयी और हमारी पहली ट्रेन थी एपी सम्पर्क क्रान्ति जो कि दिल्ली से सुबह सात बजकर 20 मिनट पर चलती है और वैसे तो तिरूपति भी जाती है पर चूंकि हमें हैदराबाद में उतरना था तो ये सुबह सवेरे सात बजे के करीब ही उतार देती है । सुबह के सात बजे दिल्ली से ट्रेन हो तो कोई बस का सहारा तो नही ले सकता उसके सामने दो ही विकल्प हैं कि या तो वो रात को दिल्ली में स्टेशन पर , होटल में या किसी परिचित के घर में जाकर रूके और सुबह पकडे या फिर सुबह गाडी करें तभी सुबह चलकर इस गाडी को पकडा जा सकता है हमारा सफर सौ किलेामीटर दूर का था इसलिये हमने एक गाडी किराये पर कर ली जो हमें लेकर दिल्ली के निजामुदीन स्टेशन पर जाने वाली थी । ट्रेन सुबह के सात बजे थी और अगले दिन पहले पडाव हैदराबाद में सुबह के सात बजे ही उतारने वाली थी । इसलिये सुबह करीब तीन बजे हम लोग बुढाना से चले और 6 बजे स्टेशन पहुंच गये । सामान सबका दो दो बैग हो गये थे क्योंकि ट्रेन में रख सकते हैं और बीस दिन के कार्यक्रम में इससे कम तो हो ही नही पाता । हालांकि सोचकर तो ये रखते हैं कि दोनेा एक एक बैग उठाकर चलेंगे लेकिन होता ये है कि अक्सर दोनो बैग हमें ही उठाकर चलने पडते हैं
मनीराम अंकल रात को ही हिसार से ट्रेन में बैठकर स्टेशन पर आ गये थे और फोन से सम्पर्क करने पर मिल गये । वो स्टेशन पर खडी हमारी गाडी में बैठ गये थे । मा0 जी और लाला जी का उनसे प्रथम मिलन हुआ और हम सबका उनकी प्यारी सी नातिन नियति से जो कि बहुत ही हंसमुख थी और पूरे सफर के दौरान ऐसा लगा ही नही कि कोई बच्चा हमारे साथ है । दिन भर तो हम सब बात करते रहे और रात को सो गये
इन्तजार रहेगा।
ReplyDeleteचलते चलो, हम साथ हैं।
ReplyDeletegood starting.
ReplyDeleteमैं भी शामिल हूँ ।
ReplyDeletechalte rahite.
ReplyDeleteye to apne trailore dikhaya pic bhi jaldi dikhana entezar rahega
ReplyDeleteबढ़िया जानकारी |
ReplyDeleteआभार ||
jaldi se post likiye
ReplyDeleteचलो अच्छा हैं अब कुछ दक्षिण के बारे में हिंदी में पढ़ने को मिलेगा......
ReplyDeleteएक नजर मेरे ब्लॉग पर भी....नैनीताल के बारे में लिखा हैं...
http://safarhainsuhana.blogspot.in/2012/09/3.html
बढ़िया यात्रा वृतांत.... शुभकामनायें
ReplyDeleteहम भी चल रहे हैं
ReplyDeleteआपकी ब्लाग ट्रेन में !
इंतज़ार रहेगा इसलिए भी क्योंकि पहला पडाव तिरुपति तिरुमाला देवस्थानम हम भी कई बार पहुंचें हैं .दर्शन भी कियें हैं VVIP .
ReplyDeleteबहुत अच्छा रोचक वृतांत आगे का इन्तजार रहेगा
ReplyDeleteगजब है भाई अभी मणिमहेश की यात्रा लाजबाब थी अब दक्षिण भारत की हिंदी में कहीं नही पढी है सेा पढने को मिलेगी । लिखते रहिये
ReplyDeleteयात्रा की पूर्वतयारी तो बहुत बढिया यात्रा के वर्णन का इंतजार है ।
ReplyDeleteThis comment has been removed by a blog administrator.
ReplyDeleteYou have shared an informative post with readers. It's really interesting.
ReplyDeleteinformative blog
ReplyDeletebhaut achcha laga. jb agla karykrm banaye to hme bhi btaye hum pti & ptni chlne ko tayar he
ReplyDeleteभाई मै अपका ब्लॉग पड्ता रहता हू लेकिन क्रम समझ नही आता की कौन भाग पहले है कौन बाद का है क्रप्या निवारण करे ।user frendly interface बनाये या सुझव दे
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